रोशनी में नहायी है धरती,
अम्बर तक फैला है उजियारा !
मन का का दीप हो प्रज्जवलित ,
दूर अज्ञान का हो अँधियारा !
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
२३-१०-२०१४
अम्बर तक फैला है उजियारा !
मन का का दीप हो प्रज्जवलित ,
दूर अज्ञान का हो अँधियारा !
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
२३-१०-२०१४
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