शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2014

****** निगाहें ********

 ****** निगाहें ********
जब पहली बार ,
उनसे निगाहें मिलीं -------
पता नहीं क्या हुआ !
 शरमा कर हमने,
पलकें झुका लीं !
जब हमने पलकें उठाईं,
तो वो एकटक,
 हमें ही देखे जा रहे थे!
जब निगाहें ,
निगाहों से मिली !
हम अपना दिल ,
हार गये !
पता नहीं क्या जादू ,
कर दिया था उन्होने ,
हम पर !
 पूरी दुनीयाँ हमें तो,
बदली-बदली नजर ,
आने लगी !
फ़िर महसूस हुआ,
बिना उनके ,
 प्यार के जिदंगी ,
कितनी अधूरी थी !
जब पहली बार ,
उनसे निगाहें मिलीं---------
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"

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