बुधवार, 8 अक्टूबर 2014

******* चाँद **********

******* चाँद **********

चाँद तुम जरा ,
आहिस्ता - आहिस्ता चलो,
मेरे मेहबूब अभी-  अभी सोये  है !.
चाँद तुम अपनी चाँदनी पर  ,
बादलों का परदा गिरालो .!
उसकी दूधिया रोशनी आ-आकर​,
   मेरे मेहबूब की आँखों मे चुभ रही .है!
तारों तुम कुछ देर के लिये ,
कहीं छिप जाओ ,
तुम्हारी टिम-टिमाहट से,
मेरे मेहबूब की नींद में
 खलल पड रहा है !
.हवाओं तुम यूँ ,शोर न मचाओ,
 जरा आहिस्ता-आहिस्ता बहो !
 कहीं वो जाग न जायें,
 .एक मुद्दत बाद वो घर आये  .है!
...राधा श्रोत्रिय"आशा

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें