शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2014

***** प्रेमाग्नी *****

******** प्रेमाग्नी *********
निशा ने अपने आँचल में ,
चाँद तारों को सजा लिया है!
चाँदनी की दूधिया रोशनी में
नहाकर वो खुद पर इठला
रहे है !
पर हमारे दिल में ये आग सी
क्युँ लगी है !
किसी ने कहा ये मोहब्बत है,
तो कुछ ने कहा दीवानगी है,
पर हम केसे बतलायें कि ये,
प्रेमाग्नि है !
जो प्रियतम के इंतजार में,
धधक उठी है-----
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें