गुरुवार, 9 अक्टूबर 2014

******* सफ़र के दौरान *******

******* सफ़र के दौरान *******
दूर -दूर तक फैली हुई हरियाली
आँखों को सुकून पहुँचाती है
और मन को तृप्त कर जाती  है
हके हुए खेतों को देखना मन 
को प्रफुल्लित कर देता है
मन तो कर रहा है गाडी रुकवा
कर मिट्टी को हाथों में भर लूँ 
फिर से जी लूँ अपना बचपन 
पल दो पल....
...राधा श्रोत्रिय"आशा"

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