बुधवार, 12 नवंबर 2014

********* मोहब्बत( एक सबब) ***********

********* मोहब्बत( एक सबब) ***********
कभी- कभी मन बहुत उदास हो जाता है,
साथ होकर भी सबके बहुत तन्हाँ होता है!
तब मन की आँखों से में तुम्हें खोजती हूँ-----
तुमने वादा किया था कि जल्द लोटोगे,
पर अब इंतजार कुछ ज्यादा ही लंबा हो गया!
लोगों के सवाल अब नशतर से चुभते हैं मुझे,
नहीं समझ पाती कि क्या जवाव दूँ,
खुद एक सवाल बनकर रह गयी हूँ में,
तुम ही बताओ कि क्या जवाव दूँ में,
आखिर कब तक खामोशी का लिबास ओढ़ूँ में!
तुम्हें लौटने में और कितना वक्त लगेगा------
डरती हूँ कहीं वादा खिलाफ़ी न हो जाये मुझसे,
मेरे माँ-पिता की आँखों से झाँकती बेबसी,
कुछ न कुछ फ़ैंसला लेने पर मज़बूर कर रही है मुझे!
में बेबफ़ा कहलाना नहीं चाहती ,
पर एक बिन ब्याही माँ को ये समाज ,
बडी हिकारत भरी निगाहो से देखता है!
लोग हमारी मोहब्बत को समझ नहीं पायेंगे,
हर तरफ़ से उठते सवालों के तीर,
 अंर्तमन को भेद रहे हैं----------
अपनी मोहब्बत की खातिर में ये सब भी,
बरदाशत कर लूँगी !
पर मेरे परिवार वालों का क्या गुनाह है,
वो क्यों इसकी सजा भुगतें !
हमारी मोहब्बत पाक है,
ये सिर्फ़ तुम और में समझते हैं !
प्यार भरे उन लम्हों में,कुछ पलों के लिये ,
हम खुद को न संभाल पाये,
उस अधीरता की इतनी बड़ी कीमत,
 चुकानी पडेगी पता न था !
अगर तुम जल्दी न लौटे तो हमारी मोहब्बत ,
किस मुकाम पर पहुँचेगी मुझे खुद नहीं पता !
शायद हम हमेशा के लिये अज़नबी बन जायें,
तुम्हारी अमानत को में हमेशा ,
सीने से लगाकर रखूँगीं,
अपने प्यार का अनमोल तोहफा समझकर​!
इतन भरोसा तो तुम्हे मुझ पर होगा ही,
और तुम्हारी यादों को हमेशा के लिये,
 दिल में दफन कर लूँगीं !
जो एक मीठा दर्द और कभी न मिटने वाले,
एहसास बनकर मेरे पास आखरी साँस तक रहेंगी !
तुम भी अपनी दुनियाँ में खुश रहना,
कभी किसी मोड पर हम मिलें भी ,
तो अज़नबी बन !
वक्त कभी किसी के लिये ठहरता नहीं,
चलते रहना ही जिंदगी है !
समय चाहे कितना ही बदल जाये,आज जबकि लडके - लडकियाँ लिव इन रिलेशन शिप को पसंद करते हैं,उसके बाद भी सोच का दायरा विस्तृत नहीं हुआ,नादानी में जो लडकियाँ भूल कर बैठती हैं,
अपना जीवन तो खराब करती ही हैं,साथ ही पुरे परिवार को शर्मिंदगी झेलनी पडती है,
सिर्फ शारिरिक संबधों को प्यार का नाम देना गलत है, ये महज़ कुछ पल का आकर्षण मात्र है,जो विपरीत सैक्स के प्रति उमडता है,जो बाद में सिर्फ बरबादी ही छोड जाता है,बहुत कम केस में,
लडके के परिवार वाले लडकी को अपनाते हैं,जिस समाज में हम रहते हैं,वहाँ बिन ब्याही माँ बनना,
गुनाह है !बिन ब्याह पिता कहलाना नहीं,क्योंकि पुरूष तो हमेशा पाक साफ़ रहते हैं !
कीचड हमेशा औरत के दामन पर ही उछाली जाती है!ये मेरे निजी विचार हैं,या जो देखने सुनने में
आता है,वो अनुभव ! आप सबकी अपनी राय हो सकती है.. अपने विचार पढ़ने के बाद आप सब भी लिखें तो मुझे अच्छा लगेगा,और कुछ नया जानने को मिलेगा, क्योंकि इस सबके चलते कितनी बच्चीयाँ अबार्शन करवाती हैं और अपनी जान को खतरे में डालती हैं, कुछ तो अवसाद में चली जाती
हैं ! क​ई बार इसका खामियाजा उन्हें अपने आने वाले जीवन में भुगतना पड़ता है कि वे कभी माँ नहीं
बन पातीं ! अपनी युवा होती बेटियों को अपनी बात खुलकर कहने की आजादी दी जाये और दोस्ताना रुख अपनाकर उन्हें ये सारी बातें समझाई जायें तो हो सकता है कि इस दिशा में एक सार्थक पहल हो..और वो इस कीचड में गिरने से बच सकें...
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
१२-११-२०१४

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