रविवार, 16 नवंबर 2014

गुमाँन

*********** गुमाँन **********
बस गये हैं,वो जब आँखों में नूर बनके,
क्यों रोशनी को गुमाँन खुद का है !
प्यार   तुम्हारा है,ये पावन लौ सा ,
दिल जलता है, तो कुसूर उसका है !
देख तुम्हें जो तुम पर मर मिटा,
कुसूर इसमें हमारी निगाहों का है !
अब जब बन गये है ,वो जिंदगी हमदम  ,
हर धडकन पर नाम अब उन्ही का है!
"आशा"देख आ जाती है,चमक आँखों में,
सामने है जो चेहरा वो जब उन्ही का है !
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"
१६-११-२०१४

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