************बादलों का परदा **************
खोल बादलों का
परदा!
सूरज ने हौले से,
बाहर झाँका!
ऊषा मुस्कुरायी,
खिल-खिला उठी,
जिंदगी!
गूँज उठे,
खेत-खलिहान,
चहचहाहट से
पंक्षीयों की!
खनक उठी पनघट पर,
पायलों की,रुन-झुन!
घूँघट मैं गौरी,
अधरों मै दबा पल्लू!
निहारते देख,
सामने सजन को,
लज्जा से सिमट गयी,
नट-खट रश्मियाँ,
सूरज की उसके चेहरे पे,
अटक गयी!
खोल बादलों का
परदा!
हौले से सूरज ने,
बाहर झाँका!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
२३-०३-२०१४
खोल बादलों का
परदा!
सूरज ने हौले से,
बाहर झाँका!
ऊषा मुस्कुरायी,
खिल-खिला उठी,
जिंदगी!
गूँज उठे,
खेत-खलिहान,
चहचहाहट से
पंक्षीयों की!
खनक उठी पनघट पर,
पायलों की,रुन-झुन!
घूँघट मैं गौरी,
अधरों मै दबा पल्लू!
निहारते देख,
सामने सजन को,
लज्जा से सिमट गयी,
नट-खट रश्मियाँ,
सूरज की उसके चेहरे पे,
अटक गयी!
खोल बादलों का
परदा!
हौले से सूरज ने,
बाहर झाँका!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
२३-०३-२०१४
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