*********** फूल *************
फूल काँटो में रहकर भी,
अपनी खुशबू नहीं खोता है!
जीवन हो या मृत्यू हो,
हर हाल में भाव सम रहता है!
जीवन का यथार्थ समझ ,
न अहम का भाव रखता है!
आना जाना है ये जीवन,
कली से फूल बन समझता है!
न रूप का कोई मोल यहाँ ,
न धन साथ दे पाता है !
जान लेता है खिलते ही,
हर हाल में वो मुस्कुराता है!
"आशा"इन्साँन होकर भी जो,
इन्सानियत न सीख पाता है!
मानव कहलाने का अधिकार,
उसको नहीं सुहाता है!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
०७-१२-२०१४
फूल काँटो में रहकर भी,
अपनी खुशबू नहीं खोता है!
जीवन हो या मृत्यू हो,
हर हाल में भाव सम रहता है!
जीवन का यथार्थ समझ ,
न अहम का भाव रखता है!
आना जाना है ये जीवन,
कली से फूल बन समझता है!
न रूप का कोई मोल यहाँ ,
न धन साथ दे पाता है !
जान लेता है खिलते ही,
हर हाल में वो मुस्कुराता है!
"आशा"इन्साँन होकर भी जो,
इन्सानियत न सीख पाता है!
मानव कहलाने का अधिकार,
उसको नहीं सुहाता है!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
०७-१२-२०१४
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