*********वक्त के हाथों *************
वक्त के हाथों, हम तो लुटे हैं,
न रोते है, न हँसते है !!
मन की पीड़ा, किससे कहें,
अपने ही ताने कसते हैं !!
वक्त ही दुशमन बन जाये तो,
अपने भी आँख बदलते हैं!!
वक्त के हाथों हम तो लुटे हैं,
न रोते है न हँसते है !!
अपनी खुद्दारी भी "आशा",
हमको शूल सी चुभती है!!
चापलूसों की है ये दुनियाँ,
सच को कहाँ, समझती है!!
वक्त के हाथों, हम तो लुटे हैं,
न रोते है, न हँसते है !!
अपने दिल की, धरती पर,
फसल आँसुओं की बोई है!!
भूख मैं खाया है गम को ,
प्यास मैं, आँसू पीये हैं!!
वक्त के हाथों, हम तो लुटे हैं,
न रोते है न हँसते है !!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
२१-०३-२०१४
वक्त के हाथों, हम तो लुटे हैं,
न रोते है, न हँसते है !!
मन की पीड़ा, किससे कहें,
अपने ही ताने कसते हैं !!
वक्त ही दुशमन बन जाये तो,
अपने भी आँख बदलते हैं!!
वक्त के हाथों हम तो लुटे हैं,
न रोते है न हँसते है !!
अपनी खुद्दारी भी "आशा",
हमको शूल सी चुभती है!!
चापलूसों की है ये दुनियाँ,
सच को कहाँ, समझती है!!
वक्त के हाथों, हम तो लुटे हैं,
न रोते है, न हँसते है !!
अपने दिल की, धरती पर,
फसल आँसुओं की बोई है!!
भूख मैं खाया है गम को ,
प्यास मैं, आँसू पीये हैं!!
वक्त के हाथों, हम तो लुटे हैं,
न रोते है न हँसते है !!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
२१-०३-२०१४
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें