गुरुवार, 18 दिसंबर 2014

कल पेशेवर पाकिस्तान में जो हुआ,बेहद अमान्वीय घटना किन शब्दों में उन बहशी दरिन्दों के लिये कुछ कहा जाये...बेहद शर्मनाक ,ओर मानवता को झकझोरने वाली घटना,
न्यूज चेनल पर एक पिता को विलाप करते हुये बार -बार दिखाया जा रहा था..देख कर आत्मा भी कराह उठी किस विकास की ओर इन्सान बढ रहा है,जहाँ हमारे नन्ही सी जाने भी सुरक्षित नहीं,ओर ये सैनिकों के बच्चे हैं,उनका बदला बच्चों से लिया,ये कैसी साजिश है,उन सैनिकों का मनोबल तोडना उन दरिन्दों की साजिश है,ईशवर उन माँ ,पिताओं को इस असहनिय दुख को सहने की शक्ती प्रदान करे...पर ये घटना समूची मानव जाति को सोचने के लिये विवश करती है,हमारे नोनिहाल भी अब सुरक्षित नहीं,इस तरह की घटनायें न बढने पायें,इस ओर ठोस कदम उठाने की जरूरत है..निर्भया का दर्द अभी भूल नहीं पाये ,एक ओर काली तारीख इतिहास में दर्ज हो गयी,आने वाली पीढीयों को क्या ज़बाब देंगे,कि इतने बुज़दिल या कमजोर ,न बहन बेटिया सुरक्षित न ही देश का भविष्य >>>>
...राधा श्रोत्रिय"आशा"

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