रविवार, 1 फ़रवरी 2015

एहसास

मेरे रुखसारों पर जब ,
हया की लाली छा जाती है!
हवायें तेरे होने का,
मुझको एहसास कराती है!
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"
०१-०२-२०१५

2 टिप्‍पणियां:

  1. कविता ने मन को बाँध लिया .. क्या खूब लिखा है .. अंतिम पंक्तियों ने जादू कर दिया है ,,..

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  2. @संजय भास्‍कर ji bahut aabhari h mitra..:)

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