रविवार, 1 फ़रवरी 2015

** रिश्ते **


****** रिश्ते **************
कुछ धागे...कोमल,नर्म,नाज़ुक,
जिनमें पिरोते हैं,
सुन्दर सपनीले एहसास​!
भाई की कलाई पर बाँध,
वचन बद्ध कर लेते हैं,
रक्षा का उपहार​...
ममता....माँ का प्यार​,
चोटी गूँथते-गूँथते,
हौले से माथे को सहला जाना!
सरसराहट सी दौड जाती थी,
पूरे जिस्म में,
जो बस गयी है अब अंर्तमन में!
उससा कोई स्पर्श, अब मिलता नहीं!
युवावस्था...सपनो का संसार​,
मन उन्मुक्त हो उडान भरता है,
परिंदे की तरह,
 ख्बाबों की नगरी से,
राज- कुमार आकर भर देता है,
सुंदर सुनहले सपने माँग में!
यौवन खिल उठता है,
उम्मीदें अंगडाई लेती हैं!
कोख मुस्कुराती है..
नन्हे सुकोमल,सपने,
आँख खोलते हैं!
परवाज़​....लिखने की चाहत​,
भारी पडती प्रतीत होती है!
हाथ पैर हिलते हैं,
पर उम्मीदें बाँध दी जाती हैं!
पर फैलाने की कोशिश ,
नाकामयाब लगती है....
दिल की शाख पर बैठी "आशा"
 उम्मीद की एक ,किरण के इंतजार में......
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"
०१-०२-२०१५

...राधा श्रोत्रिय​"आशा"
०१-०२-२०१५

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