****** रिश्ते **************
कुछ धागे...कोमल,नर्म,नाज़ुक,
जिनमें पिरोते हैं,
सुन्दर सपनीले एहसास!
भाई की कलाई पर बाँध,
वचन बद्ध कर लेते हैं,
रक्षा का उपहार...
ममता....माँ का प्यार,
चोटी गूँथते-गूँथते,
हौले से माथे को सहला जाना!
सरसराहट सी दौड जाती थी,
पूरे जिस्म में,
जो बस गयी है अब अंर्तमन में!
उससा कोई स्पर्श, अब मिलता नहीं!
युवावस्था...सपनो का संसार,
मन उन्मुक्त हो उडान भरता है,
परिंदे की तरह,
ख्बाबों की नगरी से,
राज- कुमार आकर भर देता है,
सुंदर सुनहले सपने माँग में!
यौवन खिल उठता है,
उम्मीदें अंगडाई लेती हैं!
कोख मुस्कुराती है..
नन्हे सुकोमल,सपने,
आँख खोलते हैं!
परवाज़....लिखने की चाहत,
भारी पडती प्रतीत होती है!
हाथ पैर हिलते हैं,
पर उम्मीदें बाँध दी जाती हैं!
पर फैलाने की कोशिश ,
नाकामयाब लगती है....
दिल की शाख पर बैठी "आशा"
उम्मीद की एक ,किरण के इंतजार में......
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
०१-०२-२०१५
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
०१-०२-२०१५

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