मुद्दत से था जिस का इंतजारलगा जैसे वो पल आ गयातुम्हारा साथ क्या मिलाथमी साँसों को गतिमिल गयीतुम्हारे साथ गुजारा हर लम्हामुझे खुद से दूर और और तुम्हारे और करीब ले गयाअरमान अंगड़ाई लेने लगेफ़ूलों की ख़ुशबू की तरह दिल के जज्बात महक उठेपवन ने खुश होकर चारों दिशाओं मेंसुंदर संगीत बिखेर दियापेड़ों की टहनियाँ इस तरह झूल उठी जैसे कोई वाध-यंत्रबजा रही होएक अलौकिक सुख जिसेशब्दों में नहीं ढ़ाला गयारात भी बेहद हँसी जैसे निशा नेसितारों से जड़ी चाँदनी की ओढ़नी ओढ़ ली औरमाथे पे चाँद का टीका लगालियाबेहद हसीं मंजरलगा जैसेखुदा भीहम पर मेहरबाँ हो गयामुद्दत से था जिस का इंतजारलगा जैसे वो पल आ गया...राधा श्रोत्रिय"आशा"
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