शुक्रवार, 7 मार्च 2014

***वक्त बदल गया है***


लोग कहते हैं,
वक्त बदल गया है !
पर मुझे तो लगता है ,
इंसान बदल गया है!
वक्त तो 
हमेशा से अपनी गति से,
चल रहा है !
पर ऊँचा 
उठने की चाह मैं,
इंसान और
गिर रहा है !
हर तरफ़
बिखरा हुआ है,
स्वार्थ और लालच
यहाँ!
रिश्तों को भी,
मतलब से
निभा रहा ,
हर इंसान यहाँ!
चीख रही इंसानियत,
रो रही मानवता,
खुद ही खुद की
लाश को ,
ढ़ो रहा
हर इंसान यहाँ !
विशवाश
अपनेपन,और
जज्बातों ,
की कब्र पर,
रिशतों के
फ़ूलों की चादर,
चढ़ा रहा है
हर इंसान यहाँ !
लोग कहते है
वक्त बदल गया है
...राधा श्रोत्रिय"आशा"

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