बुधवार, 14 मई 2014

साँई - राम

#<># साँई - राम #<>#
शिरडी का साँई है,
बडा ही निराला....
सबकी बिगड़ी बात​,
बनाने बाला.....
जाति,पाति के सब​,
बंधन मिटाये.......
कोढ़ी को भी गले से,
लीया लगाये........
जो जन जिस भाव से,
शिरड़ी जाता........
वैसा ही भाव बाबा के,
मन का हो जाता........
"आशा"मन से निकाल दो,
सारे विकार ..........
साँई जी से करलो,
तुम सच्चा प्यार​........
बिगड़ी बात पल में,
ही बन जायेगी.......
देखो बगीयाजीवन की,
सँवर जायेगी..........
शिरडी का साँई है,
बडा ही निराला....
सबकी बिगड़ी बात​,
बनाने बाला.....
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"
१५-०५-२०१४

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