रविवार, 15 जून 2014

पिता

******* पिता *******
वो पिता है...
अंबर जैसा विशाल हृदय रखते,
मन सागर जैसा गहरा है!
कठोर छवि रखते,
ऊपर से!
मन मैं भाव प्यार का,
गहरा है!
वो पिता हैं....
अपने बच्चों की खुशियों,
की खातिर देखो,
दिन रात वो,
मेहनत करते हैं!
दौड़ते-दौड़ते उनकी,
चप्पल घिस ग​ई हैं!
पर बच्चों को,
ब्रांडेड शूज दिलवाते हैं!
वो पिता हैं....
अच्छी शिक्षा ,
दिलवाने की खातिर​!
अपने बच्चों को,
स्कूलों के चक्कर लगाते हैं!
वो पिता हैं....
काँलेज मैं एड़मिशन ,
की खातिर कितने वो,
पापड़ बेलते हैं!
न हो हैसियत तो भी,
उधार लेकर वो,
धन को जुटाते है!
वो पिता हैं....
परवाह नहीं उन्हें,
खुद की ,
बच्चों की खुशियों की,
खातिर मन मारना,
वो सीख जाते हैं!
वो पिता हैं....
खुद का मोबाइल ,
खटारा हो रहा!
पर बच्चों को महँगा,
दिलवाते हैं!
ये भी ध्यान रखते हैं वो,
बेलैंस खुद डलवाते हैं!
बच्चा है सीख जायेगा,
कहकर अपना मन ,
बहलाते हैं!
वो पिता हैं....
बिटिया की विदा के,
मौके पर सिर वो,
अपना झुकाते हैं!
खुश रहे लाडली उनकी,
यही दुआ वो मनाते हैं!
वो पिता हैं....
जो मन के भाव ,
प्रकट नहीं करते!
सागर जैसे खुद मैं,
घुटते हैं!
देखो वादा उनका,
नहीं टूटता!
धीरज नहीं वो,
खोते हैं! 
वो पिता हैं....
"आशा" देखो दुनियाँ मैं कोई,
मात​-पिता सा नहीं होता है!
चरणों मैं उनके जन्नत का सुख​,
चेहरे मैं रब सा नूर बसता है!
वो पिता है...
अंबर जैसा विशाल हृदय रखते,
मन सागर जैसा गहरा है!
कठोर छवि रखते,
ऊपर से!
मन मैं भाव प्यार का,
गहरा है!
वो पिता है...
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"
१५-०६-२०१४

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