रविवार, 1 जून 2014

धड़कन

***धड़कन***
तेरे एहसासों मैं ही बसर,
मेरी सुबह और शाम होती है !!

मेरे दिल की हर धड़कन भी,
अब तुम्हारा ही नाम लेती है!!

...राधा श्रोत्रिय"आशा"
१४-०३-२०१४

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें