मंगलवार, 19 अगस्त 2014

एक लम्हें की दूरी *

******* एक लम्हें की दूरी ********
बडे जतन से बुना,
जो रिश्ता हमने!
सहेज हर धागे को,
पिरोया लम्हों में!
तोड दी एक पल मैं,
ख्वावों की ताबीर उसने!
किया जतन तो बहुत ,
पर न बुन पाये!
एक लम्हे की दूरी ,
आ ही गयी!
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"
  • ०८-०८-२०१४

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