रविवार, 19 अक्टूबर 2014

******** प्यार ********

******** प्यार ********
कितना प्यारा,
 रिश्ता है,
उसका और मेरा !
जब से हम मिले हैं,
बस हमारी अपनी,
प्यार सी दुनियाँ है !
बिना किसी शर्त ,
बिना किसी बंधन​!
एक दूसरे के साथ वक्त ,
गुजारना !
अनगिनत बातें करते-करते,
दूर तक चले जाना !
ढ़लती शाम में बैठकर,
दूर क्षितिज़ को,
 निहारना !
ऊगते सूरज को देख,
 खुशी से,उस पर ही,
 मुग्ध हो जाना !
सुबह की कोमल,अनछुई,
रश्मियों की तपिश को,
 साथ -साथ महसूस करना !
उडते पंक्षियों को देख ,
मन ही मन ललचाना !
हवा के झौंकों का आ-आकर ,
हमें गुद​-गुदाना !
कितना पवित्र​,पावन,निर्मल,
कोमल,मधुर​,प्यारा सा,
बंधन है !
उसके और मेरे बीच,
 शायद यही प्यार है---------
...राधा श्रोत्रिय​"अाशा"
१९-१०-२०१४

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