******** प्यार ********
कितना प्यारा,
रिश्ता है,
उसका और मेरा !
जब से हम मिले हैं,
बस हमारी अपनी,
प्यार सी दुनियाँ है !
बिना किसी शर्त ,
बिना किसी बंधन!
एक दूसरे के साथ वक्त ,
गुजारना !
अनगिनत बातें करते-करते,
दूर तक चले जाना !
ढ़लती शाम में बैठकर,
दूर क्षितिज़ को,
निहारना !
ऊगते सूरज को देख,
खुशी से,उस पर ही,
मुग्ध हो जाना !
सुबह की कोमल,अनछुई,
रश्मियों की तपिश को,
साथ -साथ महसूस करना !
उडते पंक्षियों को देख ,
मन ही मन ललचाना !
हवा के झौंकों का आ-आकर ,
हमें गुद-गुदाना !
कितना पवित्र,पावन,निर्मल,
कोमल,मधुर,प्यारा सा,
बंधन है !
उसके और मेरे बीच,
शायद यही प्यार है---------
...राधा श्रोत्रिय"अाशा"
१९-१०-२०१४
कितना प्यारा,
रिश्ता है,
उसका और मेरा !
जब से हम मिले हैं,
बस हमारी अपनी,
प्यार सी दुनियाँ है !
बिना किसी शर्त ,
बिना किसी बंधन!
एक दूसरे के साथ वक्त ,गुजारना !
अनगिनत बातें करते-करते,
दूर तक चले जाना !
ढ़लती शाम में बैठकर,
दूर क्षितिज़ को,
निहारना !
ऊगते सूरज को देख,
खुशी से,उस पर ही,
मुग्ध हो जाना !
सुबह की कोमल,अनछुई,
रश्मियों की तपिश को,
साथ -साथ महसूस करना !
उडते पंक्षियों को देख ,
मन ही मन ललचाना !
हवा के झौंकों का आ-आकर ,
हमें गुद-गुदाना !
कितना पवित्र,पावन,निर्मल,
कोमल,मधुर,प्यारा सा,
बंधन है !
उसके और मेरे बीच,
शायद यही प्यार है---------
...राधा श्रोत्रिय"अाशा"
१९-१०-२०१४
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