शनिवार, 13 दिसंबर 2014

यादों की पुरवाई *

*********** यादों की पुरवाई ******
आज फिर तेरी यादों की,
पुरबाई चली है !
महक उठी है,साँसें मेरी ,
आँखों में तेरी छवि है!
इशक का रंग,जब चढा,
कद मेरा ,कुछ ओर बढा!
भूल गयी में, वज़ूद अपना,
तेरे रंग में खुद को रंगा !
प्यार में रिशतों का,
कहाँ मोल है!
मेल मन से मन का ,
अनमोल है !
मिलना ओर बिछडना,
ही जीवन है !
पर रूह से रूह का रिशता,
 कायम है !
मोहब्बत खुदा की बख्शी,
नेमत है!
पर कहाँ सब पर उसकी,
रहमत है!
दिल के रिश्ते बनाना,
आसाँन नहीं है!
जुदाई,दुख ,दर्द​,तडप , 

इसके  संगी-साथी है!
"आशा"किसी से दिल की,
लगन सच्ची है,
तो वीराने  भी,मोसमें-बहार
 लगते हैं!
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"
१३-१२-२०१४

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