बुधवार, 10 दिसंबर 2014

** ख्बाबों ख्यालों में *****

************ ख्बाबों ख्यालों में ***************
तुम इस तरह, ख्बाबों में,आया न करो,
ख्यालों में, इस तरह, सताया,न करो !
देखकर,  बेकरारी, ये   तुम्हारी,
थम सी, जाती हैं,साँसें ये हमारी!
 चाहतों के मोती यूँ ,  बिखराया न करो!
तुम इस तरह ख्बाबो में,आया न करो,
दिल का रिशता है तुमसे,
 एतबार करो !
 बेताबी का अपनी, न यूँ,
इज़हार करो !
लोगों का क्या है,हर बात का,
 सबब पूछेंगें!
 भरी दुनियाँ में, तुम   हमें,
यूँ रुसवा न करो!
तुम इस तरह, ख्बाबो में,आया न करो,
ख्यालों में इस तरह सताया,न करो !
वफ़ा के मोती  जडे हैं,
दामन में,  हमने!
मोहब्बत की निशानी है ये,
भुलाया ,न करो !
खो जाते हैं,होश मेरे,
देख काँपते, होंठ तेरे!
तुम इस तरह अश्क बहाया, न करो,
ख्यालों में इस तरह सताया,न करो !
 देखकर कशिश, मोहब्बत कि,
 तडप उठते हैं हम !
फूल से चेहरे को यूँ​,
   मुरझाया न करो !
कि  भुलाकर जमाने के  बंधन सारे ,
तेरे अागोश में ही समाँ जाऊँ में!
तोड़ दूँ  हदें "आशा" सारी रस्मों की,
तुझमें खो,  बस तेरी ही, हो जाऊँ में !
तुम इस तरह अश्क, बहाया न करो,
ख्यालों में इस तरह सताया,न करो !
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"
​१०-१२-२०१४

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