************ ख्बाबों ख्यालों में ***************
तुम इस तरह, ख्बाबों में,आया न करो,
ख्यालों में, इस तरह, सताया,न करो !
देखकर, बेकरारी, ये तुम्हारी,
थम सी, जाती हैं,साँसें ये हमारी!
चाहतों के मोती यूँ , बिखराया न करो!
तुम इस तरह ख्बाबो में,आया न करो,
दिल का रिशता है तुमसे,
एतबार करो !
बेताबी का अपनी, न यूँ,
इज़हार करो !
लोगों का क्या है,हर बात का,
सबब पूछेंगें!
भरी दुनियाँ में, तुम हमें,
यूँ रुसवा न करो!
तुम इस तरह, ख्बाबो में,आया न करो,
ख्यालों में इस तरह सताया,न करो !
वफ़ा के मोती जडे हैं,
दामन में, हमने!
मोहब्बत की निशानी है ये,
भुलाया ,न करो !
खो जाते हैं,होश मेरे,
देख काँपते, होंठ तेरे!
तुम इस तरह अश्क बहाया, न करो,
ख्यालों में इस तरह सताया,न करो !
देखकर कशिश, मोहब्बत कि,
तडप उठते हैं हम !
फूल से चेहरे को यूँ,
मुरझाया न करो !
कि भुलाकर जमाने के बंधन सारे ,
तेरे अागोश में ही समाँ जाऊँ में!
तोड़ दूँ हदें "आशा" सारी रस्मों की,
तुझमें खो, बस तेरी ही, हो जाऊँ में !
तुम इस तरह अश्क, बहाया न करो,
ख्यालों में इस तरह सताया,न करो !
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
१०-१२-२०१४
तुम इस तरह, ख्बाबों में,आया न करो,
ख्यालों में, इस तरह, सताया,न करो !
देखकर, बेकरारी, ये तुम्हारी,
थम सी, जाती हैं,साँसें ये हमारी!
चाहतों के मोती यूँ , बिखराया न करो!
तुम इस तरह ख्बाबो में,आया न करो,
दिल का रिशता है तुमसे,
एतबार करो !
बेताबी का अपनी, न यूँ,
इज़हार करो !
लोगों का क्या है,हर बात का,
सबब पूछेंगें!
भरी दुनियाँ में, तुम हमें,
यूँ रुसवा न करो!
तुम इस तरह, ख्बाबो में,आया न करो,
ख्यालों में इस तरह सताया,न करो !
वफ़ा के मोती जडे हैं,
दामन में, हमने!
मोहब्बत की निशानी है ये,
भुलाया ,न करो !
खो जाते हैं,होश मेरे,
देख काँपते, होंठ तेरे!
तुम इस तरह अश्क बहाया, न करो,
ख्यालों में इस तरह सताया,न करो !
देखकर कशिश, मोहब्बत कि,
तडप उठते हैं हम !
फूल से चेहरे को यूँ,
मुरझाया न करो !
कि भुलाकर जमाने के बंधन सारे ,
तेरे अागोश में ही समाँ जाऊँ में!
तोड़ दूँ हदें "आशा" सारी रस्मों की,
तुझमें खो, बस तेरी ही, हो जाऊँ में !
तुम इस तरह अश्क, बहाया न करो,
ख्यालों में इस तरह सताया,न करो !
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
१०-१२-२०१४
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