************ उनकी खातिर ************
उनकी खातिर ही हम,
सजते ओर सँवरते हैं !
पर कहाँ वो ये बात समझते हैं----
आस्माँ से तोड सितारे,
माँग भरने की बात करते हैं !
पर कहाँ मन की बात वो समझते हैं-----
हमारी हँसी में वो फूलों की,
बात करते हैं !
पर हम तो उनके प्यार से ही,
निखरते हैं !
पर कहाँ वो ये बात समझते हैं----
हमें नहीं चाहत चाँद ,
सितारों की !
हम तो उनकी मुस्कान पर ,
ही मर मिटते हैं!
पर वो हैं जो इतनी सी बात भी,
नहीं समझते हैं!
"आशा" उनका प्यार ही,
हमारा श्रंगार है !
वो ही तो हमारे जीवन का,
आधार हैं !
पर कहाँ वो ये बात समझते हैं----
उनकी खातिर ही हम,
सजते ओर सँवरते हैं !
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
१०-१२-२०१४
उनकी खातिर ही हम,
सजते ओर सँवरते हैं !
पर कहाँ वो ये बात समझते हैं----
आस्माँ से तोड सितारे,
माँग भरने की बात करते हैं !
पर कहाँ मन की बात वो समझते हैं-----
हमारी हँसी में वो फूलों की,
बात करते हैं !
पर हम तो उनके प्यार से ही,
निखरते हैं !
पर कहाँ वो ये बात समझते हैं----
हमें नहीं चाहत चाँद ,
सितारों की !
हम तो उनकी मुस्कान पर ,
ही मर मिटते हैं!
पर वो हैं जो इतनी सी बात भी,
नहीं समझते हैं!
"आशा" उनका प्यार ही,
हमारा श्रंगार है !
वो ही तो हमारे जीवन का,
आधार हैं !
पर कहाँ वो ये बात समझते हैं----
उनकी खातिर ही हम,
सजते ओर सँवरते हैं !
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
१०-१२-२०१४
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