मंगलवार, 2 दिसंबर 2014

* एक खूबसूरत एहसास

************** एक खूबसूरत एहसास **********************
एक खूबसूरत एहसास है प्यार ,
जैसे पहाडों पर मौसम की.
 पहली बर्फ़बारी!
या सर्दियों की मखमली धूप से,
खिल उठी हो फूलों की हर क्यारी !
गरमीयों में सुबह की मदमस्त बयार ---
इठलाती नदियों की कल​-कल का उपहार​,
तितली भँवरों का फूलों से प्यार,
मंदिर से आती घंटियों की झंकार​!
जैसे मस्ज़िद से आती अज़ान ,
पंक्षीयों का सुमधुर गान,
नन्हें-मुन्ने की तुतलाती आवाज !
नन्हीं लाडली की,
पायलों की रुन-झुन है प्यार​-------
कितना खूबसूरत है,ये एहसास ,
दौलत से नहीं तौला जाता इसे,
न ही इसे मापने का कोई पैमाना है !
पता नहीं कब और कैसे हो जाता है,
बस जाता है,रूह की गहराईयों में!
एक पवित्र पावन सा एह्सास है प्यार​
जैसे मंदिर में भगवान की मूरत​,
माँगने से जो मिल जाये "आशा"
वो नहीं है प्यार !
भगवान कहाँ किसी को मिलता है !
पवित्र सुगंध की तरह ,
महकाता है जीवन!
पूजा का ही दूसरा रूप है प्यार ,
स्त्री के लिये उसका सतित्व है प्यार ,
एक खूबसूरत एहसास है प्यार,
जैसे पहाडों पर मौसम की.
 पहली बर्फ़बारी!
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"
०२-१२-२०१४

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