जिंदगी के प्रति मेरा नज़रिया कुछ अलग है!दुसरे जो करते हैं उनके जैसा रहना या बनना मुझे पसंद नहीं! मेरा मानना है,उस प्रभु ने हमें जो जीवन दीया उसे अपने तरीके से जीने का अधिकार सबको होना चाहिये,एक छोटे बच्चे को भी उसकी बात कहने की स्वतंत्रता होनी चाहिये!यही होता आ रहा है,या परम्परा है,उसमें मेरा यकीन नहीं,सोचने बोलने की आजादी समान रूप से सबको होना चाहिये,ये सिर्फ़ पुरुषों का अधिकार नहीं! हर बच्ची ,ओर स्त्री को भी वैचारिक स्वतंत्रता मिले..खुली हवा में साँस लेने का अधिकार सबको हो!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
०२-१२-२०१४
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
०२-१२-२०१४
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