शुक्रवार, 5 दिसंबर 2014

******जिंदगी के रंग *******

**********जिंदगी के रंग ************
पल​-पल में जिंदगी के रंग, बदलते चले गये,
गैर तो गैर अपने भी बदलते चले गये !
जिंदगी मान जिनको,   बेफ़िक्र हम हो गये,
वक्त पडा तो  वही, किनारा कर चले गये !
 अपना कहें किसे  अब​,  कोन सुनेगा दर्दे-दिल​,
दिल जिसपे लुटाया,वही जख्मी कर चले गये!
हुनरमंद तो थे, आसाँन भी था,रफू कर लेते, 
हाथों को बेदर्दी से वो,लहु - लुहान कर चले गये!
 मोहब्बत की निशानी समझ, पहना था जिसे ,
 न पता था,  वो हमे, नासूर दे, चले गये!
रोता है दिल ,कोई इस तरह ,किसी को न छले, 
खुदा जिसको, माना वो,ठुकराकर,चले गये !
ये,दुनियाँ बेमुरब्बत है "आशा"किस पर यकींन करे,
बदलते मोसम की तरह वो, रंग बदलकर चले गये !
अच्छा हुआ,जो भरम था वो,जल्दी ही टूट गया ,
जिंदगी के रंग ,वो सारे, लूट कर चले गये !
पल​-पल में जिंदगी के रंग, बदलते चले गये,
गैर तो गैर अपने भी बदलते चले गये !
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"
०४-१२-२०१४

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